भारत में 30 वर्षों में SAMSUNG ने कारोबार से आगे क्या-क्या बनाया
पिछले 30 वर्षों में भारत एक ऐसे बाजार से, जो दुनिया के लिए खुल रहा था, 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की आकांक्षा रखने वाली अर्थव्यवस्था में बदल गया है। इस बदलाव को उन कंपनियों के निवेश ने भी आकार दिया है, जिन्होंने भारत के भविष्य में भरोसा जताया। Samsung भी ऐसी ही कंपनियों में से एक है। 1995 में भारत में प्रवेश करने के बाद से कंपनी ने देश के विनिर्माण, रोजगार, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के इकोसिस्टम में योगदान दिया है।
तीन दशक बाद, इस निवेश का असर Samsung की उन फैक्ट्रियों में दिखाई देता है, जहां से वैश्विक बाजारों के लिए उत्पाद भेजे जाते हैं; उन भारतीय इंजीनियरों के काम में दिखता है, जो दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक विकसित कर रहे हैं; और उन सामुदायिक कार्यक्रमों में नजर आता है, जिनके जरिए Samsung के अनुसार 15 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है। कंपनी के निवेश ने औद्योगिक उत्पादन से लेकर युवाओं को खुद तकनीक विकसित करने के लिए तैयार करने तक कई क्षेत्रों में क्षमताओं को मजबूत करने में मदद की है।

Samsung Southwest Asia के प्रेसिडेंट एवं CEO जेबी पार्क ने कहा, “तीस साल पहले कई वैश्विक कंपनियां भारत में इसलिए आईं क्योंकि उन्होंने यहां एक बड़ा बाजार देखा। SAMSUNG इसलिए आया क्योंकि हमने इससे कहीं बड़ी चीज देखी—हमने संभावनाएं देखीं।”
कंपनी ने नोएडा और चेन्नई में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित की हैं। इसके अलावा Samsung के तीन R&D केंद्र और एक डिजाइन सेंटर भी हैं तथा कंपनी ने भारत में 14,000 से अधिक पेटेंट दाखिल किए हैं।
विनिर्माण ने इस पूरी यात्रा की नींव रखी। Samsungका नोएडा प्लांट, जो दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में से एक है, एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। चेन्नई स्थित फैक्ट्री के साथ मिलकर यह भारत में कंपनी की उत्पादन क्षमता को मजबूत करता है। Samsung अब अपने कंपोनेंट इकोसिस्टम को भी और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में स्थानीय स्तर पर उसकी गतिविधियों का दायरा और बढ़ सकता है।
हालांकि, इससे भी महत्वपूर्ण बदलाव भारतीय इंजीनियरों द्वारा किए जा रहे काम में आया है। Samsung के तीन R&D केंद्र और डिजाइन सेंटर मैन्युफैक्चरिंग के साथ रिसर्च और डिजाइन को भी समान महत्व देते हैं। इससे भारत में कंपनी के संचालन को उन उत्पादों और तकनीकों के विकास में भूमिका मिलती है, जिन्हें दुनिया भर में इस्तेमाल किया जाता है।
1.4 अरब लोगों के लिए ऐसी तकनीक डिजाइन करना, जिनकी भाषाएं, क्षमताएं और डिजिटल तकनीक से परिचित होने का स्तर अलग-अलग है, इस बात की परीक्षा है कि तकनीक कितनी सहज और समावेशी हो सकती है। इन जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए समाधान दूसरे देशों के उपभोक्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। इस तरह भारत की विविधता Samsung के वैश्विक इनोवेशन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण ताकत बनती है।
1.4 अरब लोगों के लिए ऐसी तकनीक डिजाइन करना, जिनकी भाषाएं, क्षमताएं और डिजिटल तकनीक से परिचित होने का स्तर अलग-अलग है, इस बात की परीक्षा है कि तकनीक कितनी सहज और समावेशी हो सकती है। इन जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए समाधान दूसरे देशों के उपभोक्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। इस तरह भारत की विविधता Samsung के वैश्विक इनोवेशन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण ताकत बनती है।
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम भारत में तकनीक लाने से आगे बढ़कर भारत के साथ मिलकर तकनीक बनाने की दिशा में आगे बढ़े हैं।”
इस बदलाव को बनाए रखने के लिए जरूरी कौशल विकसित करना सिर्फ Samsung के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। “Together for Tomorrow. Enabling People” के अपने विजन के तहत कंपनी स्कूली शिक्षा से लेकर तकनीकी प्रशिक्षण, कार्यस्थल के अनुभव और युवा नवाचार तक कई स्तरों पर अवसर उपलब्ध करा रही है।
Samsung Innovation Campus ने AI, Big Data, IoT और कोडिंग के क्षेत्र में 26,500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया है। 2022 में भारत में इसकी शुरुआत के बाद से पिछले साल ही करीब 20,000 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें लगभग आधी महिलाएं थीं। वहीं DOST के विस्तारित सेल्स प्रोग्राम का लक्ष्य वंचित समुदायों के 13,000 युवाओं को प्रशिक्षण देना है। इस कार्यक्रम में कक्षा आधारित प्रशिक्षण के साथ रिटेल स्टोर्स में पांच महीने का भुगतान वाला कार्यस्थल प्रशिक्षण भी शामिल है।
स्कूल स्तर पर DigiArivu, तमिलनाडु के कांचीपुरम और रानीपेट जिलों के 10 सरकारी स्कूलों में 3,000 छात्रों तक STEM लैब, डिजिटल लर्निंग और शिक्षकों के विकास से जुड़े कार्यक्रम पहुंचाता है।
मेट्रो शहरों से बाहर AI और तकनीक के बढ़ते प्रसार का एक स्पष्ट संकेत इस वर्ष की Samsung Solve for Tomorrow प्रतियोगिता से मिलता है। इसमें 648 शहरों से आवेदन प्राप्त हुए और 135 शहरों में 184 डिजाइन-थिंकिंग वर्कशॉप आयोजित की गईं। इसके 20 फाइनलिस्ट टीमों में से आधे से अधिक ओडिशा के सुंदरगढ़, आंध्र प्रदेश के चित्तूर और उत्तर प्रदेश के रायबरेली जैसे शहरों से हैं। इनमें से पांच टीमें “AI Living for India” थीम के तहत समाधान विकसित कर रही हैं। सभी टीमें IIT दिल्ली और Samsung के रिसर्च सेंटरों के मेंटर्स के साथ काम कर रही हैं। अक्टूबर में होने वाले फिनाले से पहले उन्हें मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिसमें 2 करोड़ रुपये के इनक्यूबेशन ग्रांट उपलब्ध कराए जाएंगे।
पार्क कहते हैं, “हमारे लिए लोगों में निवेश करना परोपकार नहीं है। यह राष्ट्र निर्माण है।”
यह सोच तब व्यावहारिक रूप लेती है, जब युवा प्रतिभागियों को रिसर्चर्स तक पहुंच, प्रोटोटाइप तैयार करने में सहयोग और इनक्यूबेशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। तीन दशकों में भारत के साथ Samsung का जुड़ाव केवल देश में अपने कारोबार और संचालन को स्थापित करने तक सीमित नहीं रहा है। यह अब विश्वविद्यालयों, स्कूलों और समुदायों में क्षमताओं को विकसित करने तक विस्तारित हो चुका है।
