शेमारूमी की ‘एक कन्या कुँवारी’ में अपनी पसंद और पहचान तलाशती महिला के किरदार पर जान्हवी गुरनानी
गुजराती परिवार में जीवनसाथी की तलाश कभी भी सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं होती। इसमें पूरा परिवार शामिल होता है, जहां हर किसी की अपनी राय, सवाल और सुझाव होते हैं और जाहिर है, रिश्ते तय कराने की कोशिशें भी खूब होती हैं। शेमारूमी पर उपलब्ध शेमारू प्रीमियर ओरिजिनल ‘एक कन्या कुँवारी’ इसी पारिवारिक माहौल को हास्य और आत्मीयता के साथ पर्दे पर पेश करता है।
यह सीरीज शिवानी दवे की कहानी है, जिसका किरदार जान्हवी गुरनानी ने निभाया है। शिवानी वडोदरा के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक
रखने वाली आत्मविश्वासी और स्वतंत्र विचारों वाली बैंक कर्मचारी है। हर एपिसोड में जब शिवानी एक के बाद एक संभावित जीवनसाथियों से मिलती है, तो हर मुलाकात अपने साथ कुछ असहज पल, अप्रत्याशित परिस्थितियां और परिवार की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं लेकर आती है। जहां उसका परिवार चाहता है कि वह जल्द से जल्द शादी करके अपनी जिंदगी में सेटल हो जाए, वहीं शिवानी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसे ऐसा जीवनसाथी मिले, जो वास्तव में उसके लिए सही हो। इसके बाद शुरू होता है पारिवारिक अपेक्षाओं, रिश्ते तय करने की कवायद और आधुनिक रिश्तों के बीच एक मजेदार और सहजता से जुड़ाव महसूस कराने वाला सफर, जहां शिवानी को एहसास होता है कि सही जीवनसाथी की तलाश के साथ-साथ खुद को बेहतर ढंग से समझना भी उतना ही जरूरी है।

इस कहानी को दर्शकों से जोड़ने वाली बात पर अपने विचार साझा करते हुए जान्हवी गुरनानी कहती हैं, “मुझे लगता है कि हर लड़की खुद को शिवानी के किरदार में थोड़ा-बहुत जरूर देख पाएगी। वह भी शादी, परिवार की अपेक्षाओं और रिश्तेदारों द्वारा रिश्ता तय कराने की कोशिशों के बीच पली-बढ़ी है, लेकिन वह इन सबके बीच अपनी पहचान खोना नहीं चाहती। उसे अच्छी तरह पता है कि वह जिंदगी में क्या चाहती है और वह सिर्फ किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं चुनना चाहती, जो कागजों पर एक अच्छा रिश्ता नजर आए, बल्कि उसे ऐसा इंसान चाहिए जो वास्तव में उसके लिए सही हो। मुझे उसकी सबसे अच्छी बात यह लगती है कि वह अपने परिवार और अपनी जड़ों का सम्मान करती है, लेकिन साथ ही यह भी जानती है कि उसकी जिंदगी और उसके फैसले भी उतने ही मायने रखते हैं। यही संतुलन शिवानी के किरदार को मेरे लिए इतना वास्तविक और सहज बनाता है। शेमारूमी के साथ हम इस कहानी के उस खास रंग को बरकरार रख पाए हैं, जिसमें इसकी भाषा, रिश्ते, हास्य और वे तमाम छोटी-छोटी बातें शामिल हैं, जो इस कहानी को खास बनाती हैं।”
शिवानी की कहानी उस दबाव को भी दर्शाती है, जिसका सामना कई कामकाजी महिलाएं करती हैं। एक ओर वे अपनी शर्तों पर अपनी जिंदगी संवारना चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर जल्द से जल्द शादी करके घर बसाने की अपेक्षा भी लगातार बनी रहती है।
शादी को लेकर शिवानी की सोच में वह खुद को कितना देखती हैं, इस बारे में बात करते हुए जान्हवी आगे कहती हैं, “मुझे लगता है कि शादी को लेकर शिवानी और मेरी सोच काफी हद तक एक जैसी है। हम दोनों मानते हैं कि एक अच्छी बेटी होने का मतलब हर बात पर हाँ कहना नहीं है। किसी बात के लिए ‘ना’ कहना आपको मुश्किल स्वभाव का इंसान नहीं बनाता, बल्कि यह दर्शाता है कि आप अपनी अहमियत समझते हैं और जानते हैं कि आपको जिंदगी में क्या चाहिए। शिवानी अपने परिवार, अपनी जड़ों और उन मूल्यों का सम्मान करती है, जिनके बीच वह बड़ी हुई है। उसकी यात्रा किसी परफेक्ट इंसान को तलाशने की नहीं, बल्कि अपने लिए सही जीवनसाथी ढूंढने की है, ऐसा व्यक्ति जो उस महिला का सम्मान करे, जो वह है और उस जिंदगी का भी, जिसे वह अपने तरीके से बनाना चाहती है। मुझे लगता है कि आज की कई युवा महिलाएं इस सोच और बातचीत से खुद को जोड़ पाएंगी।”
पारिवारिक रिश्तों, हास्य और आधुनिक रिश्तों से जुड़े समकालीन विचारों के खूबसूरत मेल के साथ ‘एक कन्या कुँवारी’ अरेंज मैरिज की प्रक्रिया को एक सहज और दिलचस्प अंदाज में प्रस्तुत करता है। गुजराती संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं में रची-बसी यह कहानी उन भावनाओं और परिस्थितियों को भी सामने लाती है, जिनसे हर संस्कृति के लोग खुद को जोड़ सकते हैं।
देखना न भूलें शेमारू प्रीमियर ओरिजिनल ‘एक कन्या कुँवारी’, जिसका प्रीमियर २२ अक्टूबर को विशेष रूप से शेमारूमी पर हुआ।
