सिद्धार्थ रांदेरिया की ‘जिंदगी वन्स मोर’ अब शेमारूमी पर, दूसरे मौके, रिश्तों और पिता-पुत्र के भावनात्मक रिश्ते की कहानी
शेमारूमी पर १७ सितंबर २०२६ से धर्मा प्रोडक्शंस की पहली गुजराती फिल्म ‘जिंदगी वन्स मोर’ दिखाई जाएगी। फिल्म में जाने-माने गुजराती अभिनेता सिद्धार्थ रांदेरिया मुख्य भूमिका में हैं।
‘जिंदगी वन्स मोर’ एक ऐसे दूसरे मौके की कहानी है, जो इंसान को अपने बीते हुए समय को फिर से देखने, अपनों से दोबारा जुड़ने और उन बातों को कहने का मौका देता है, जो कभी कही नहीं जा सकीं। फिल्म यह भी दिखाती है कि कई बार हम अपने सबसे करीबी लोगों को समझने के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। फिल्म की कहानी एक पिता के इर्द-गिर्द घूमती है। परिवार में पिता को अक्सर मजबूत और कम बोलने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। वह अपनी भावनाओं को अपने तक रखते हैं और परिवार को हमेशा सबसे आगे रखते हैं। फिल्म इसी पिता के उस पहलू को सामने लाती है, जो अक्सर उनकी खामोशी और मजबूती के पीछे छिपा रह जाता है।

कहानी में एक बेटा अपने पिता के जीवन के उन पहलुओं को जानने की कोशिश करता है, जिनसे वह अब तक अनजान था। इस सफर में उसे पता चलता है कि उसके पिता सिर्फ उसके पिता नहीं हैं, बल्कि उनका अपना एक जीवन, अपनी दोस्तियाँ, सपने और कई ऐसी यादें हैं, जिनके बारे में परिवार ने कभी बात नहीं की। फिल्म यह संदेश देती है कि कभी-कभी जिन लोगों को हम अपना नायक मानते हैं, वे हमारे आसपास ही मौजूद होते हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें एक नए नजरिए से देखने और समझने की होती है।
धर्मा प्रोडक्शंस की यह गुजराती सिनेमा में पहली फिल्म है। फिल्म का निर्माण वार्ताकार फिल्म्स ने किया है और इसके निर्माता वासु धोलकिया हैं। धर्मा प्रोडक्शंस ने फिल्म के प्रस्तुतकर्ता और वितरक के रूप में जुड़कर गुजराती सिनेमा में कदम रखा है। फिल्म में सिद्धार्थ रांदेरिया पिता की भूमिका में हैं, जबकि दीप धोलकिया उनके बेटे शेखर का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म पहले १९ जून २०२६ को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और अब १७ सितंबर २०२६ से शेमारूमी पर दिखाई जाएगी।
फिल्म में पिता की भूमिका निभा रहे सिद्धार्थ रांदेरिया ने कहा, “ऐसे पिता का किरदार निभाना, जो अपने भीतर बहुत कुछ रखते हैं लेकिन बहुत कम व्यक्त करते हैं, मेरे लिए बेहद भावुक अनुभव रहा। परिवार में पिता को अक्सर मजबूत और कम बोलने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनकी खामोशी के पीछे क्या है, इसे समझने का मौका कम ही मिलता है। ‘जिंदगी वन्स मोर’ ने मुझे उस शांत मजबूती को पर्दे पर दिखाने का मौका दिया। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को अपने पिता को थोड़ा और अपनापन और समझ के साथ देखने के लिए प्रेरित करेगी। मैं इस बात को लेकर भी उत्साहित हूं कि अब यह फिल्म शेमारूमी पर दिखाई जाएगी।”
दीप धोलकिया ने अपने किरदार के बारे में कहा, “अपने माता-पिता को समझना कभी आसान नहीं होता। एक मां अक्सर अपनी भावनाएं खुलकर बता सकती है, लेकिन पिता शायद ही कभी अपनी भावनाएं दिखाते हैं और हमेशा मजबूत बने रहने की कोशिश करते हैं। यह फिल्म पिता के इसी पहलू को सामने लाती है और बताती है कि माता-पिता बनने से पहले उनका भी अपना एक जीवन था।”
उन्होंने आगे कहा, “पिता अक्सर अपने परिवार के लिए अपने सपनों को पीछे रख देते हैं। लेकिन हम शायद ही कभी यह जानने के लिए समय निकालते हैं कि उन्हें किस चीज से खुशी मिलती है या पिता बनने से पहले उनका जीवन कैसा था। फिल्म में शेखर अपने पिता के अतीत को जानने की कोशिश करता है और पिता की भूमिका के पीछे छिपे उस इंसान को पहचानता है।”
“मेरे पिता ही ‘जिंदगी वन्स मोर’ लिखने की प्रेरणा थे। शेखर का किरदार निभाते हुए मैंने अपने पिता को भी एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया। इससे उनके साथ मेरे रिश्ते की समझ और गहरी हुई। मुझे लगता है कि हर युवा को यह फिल्म देखनी चाहिए, क्योंकि यह हमें याद दिलाती है कि हमें अपने परिवार को हल्के में नहीं लेना चाहिए और उन लोगों को समझने के लिए समय निकालना चाहिए, जो हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।”
शेमारूमी लगातार ऐसी गुजराती कहानियां दर्शकों तक पहुंचाता रहा है, जो मनोरंजन के साथ भावनाओं से भी जुड़ती हैं। ‘जिंदगी वन्स मोर’ भी परिवार, रिश्तों, भावनाओं और जीवन में मिले दूसरे मौके की कहानी है। फिल्म याद दिलाती है कि कभी-कभी जिंदगी हमें अपने सबसे करीब के लोगों को समझने और उनसे दोबारा जुड़ने का एक और मौका देती है।
‘जिंदगी वन्स मोर’ १७ सितंबर २०२६ से केवल शेमारूमी पर देखें।
