लगभग 90% क्रिप्टो निवेशक टैक्स से से अवगत, 66% ने इसे अनुचित बताया: CoinSwitch सर्वे

लगभग 90% क्रिप्टो निवेशक टैक्स से से अवगत, 66% ने इसे अनुचित बताया: CoinSwitch सर्वे

रिपोर्ट में सरल, स्पष्ट और बाजार के अनुरूप क्रिप्टो टैक्स ढांचे की मांग सामने आई

दिल्ली, 22 जनवरी 2025: फरवरी में पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले, CoinSwitch ने भारत में क्रिप्टो (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स – वीडीए) के टैक्सेशन और रेगुलेशन को लेकर निवेशकों की सोच जानने के लिए किए गए एक देशव्यापी सर्वे के निष्कर्ष जारी किए हैं।

सर्वे से पता चलता है कि भारत के मौजूदा क्रिप्टो टैक्स ढांचे को लेकर निवेशकों में अच्छी समझ है। लगभग 90% उत्तरदाताओं ने बताया कि वे प्रमुख नियमों से परिचित हैं, जिनमें मुनाफे पर 30% टैक्स, नुकसान को सेट-ऑफ या आगे ले जाने की अनुमति न होना, और हर लेनदेन पर 1% टीडीएस शामिल है। इसके बावजूद, ज़्यादातर निवेशकों ने मौजूदा ढांचे को लेकर असंतोष जताया। 66% का मानना है कि वर्तमान क्रिप्टो टैक्स व्यवस्था उचित नहीं है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए CoinSwitch के को-फाउंडर श्री आशीष सिंघल ने कहा, “सर्वे साफ दिखाता है कि निवेशक टैक्स से छूट नहीं चाहते, बल्कि व्यावहारिक सुधार चाहते हैं। वे कम टैक्स दरों, नुकसान की सेट-ऑफ की सुविधा, कम टीडीएस और स्थापित फाइनेंशियल मार्केट्स के अनुरूप साफ नियमों के पक्ष में हैं। नतीजे बताते हैं कि निवेशक जानकार हैं, नियमों का पालन करने को तैयार हैं और एक निष्पक्ष व साफ-सुथरा ढांचा चाहते हैं। यूनियन बजट के करीब आते हुए, क्रिप्टो टैक्सेशन में सुधार और रेगुलेटरी स्पष्टता, देश के भीतर नियमों के तहत भागीदारी को बढ़ावा दे सकती है और एक ज्यादा पारदर्शी व व्यवस्थित डिजिटल एसेट इकोसिस्टम बनाने में मदद कर सकती है।”

टैक्सेशन का असर निवेशकों के व्यवहार पर भी दिख रहा है। 59% उत्तरदाताओं ने कहा कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था के कारण उन्होंने क्रिप्टो में निवेश या ट्रेडिंग कम कर दी है। इससे संकेत मिलता है कि वर्तमान टैक्स ढांचा बाजार में भागीदारी को प्रभावित कर रहा है, जिसका असर ट्रेडिंग वॉल्यूम, लिक्विडिटी और देश के भीतर होने वाली गतिविधियों पर पड़ सकता है।

वहीं, 17% निवेशकों ने अपनी भागीदारी बढ़ने की बात कही, जबकि 16% ने कहा कि टैक्सेशन का उनकी गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा। इन वर्गों ने बताया कि टैक्स नियमों के बावजूद उनकी भागीदारी स्थिर रही या बढ़ी है। इससे यह समझ आता है कि कुछ निवेशक लंबे समय के नजरिये से निवेश कर रहे हैं और अल्पकालिक टैक्स बोझ से ज़्यादा उन्हें साफ नियमों की अहमियत है।

ज़्यादातर निवेशक क्रिप्टो को भारत की मुख्यधारा की फाइनेंशियल टैक्स प्रणाली में शामिल किए जाने के पक्ष में हैं। 61% का मानना है कि क्रिप्टो पर टैक्स इक्विटी या म्यूचुअल फंड की तरह लगाया जाना चाहिए, जबकि 17% एक अलग टैक्स ढांचा चाहते हैं। यह दर्शाता है कि निवेशक स्थापित फाइनेंशियल साधनों के अनुरूप व्यवहार को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जानकारी के स्रोतों की बात करें तो, 30% उत्तरदाता क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और एक्सचेंज पर निर्भर हैं, इसके बाद न्यूज मीडिया (27%) और सोशल मीडिया (25%) का नंबर आता है। इससे निवेशकों तक सही जानकारी पहुंचाने में प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और भरोसेमंद व एकसमान रेगुलेटरी संवाद की जरूरत सामने आती है।

टैक्सेशन के अलावा, सर्वे में साफ नियमों की अहमियत भी सामने आई है। 80% से ज्यादा उत्तरदाताओं ने रेगुलेटरी स्पष्टता को जरूरी बताया, जिनमें 60% ने इसे बेहद जरूरी माना। यह दिखाता है कि लंबे समय तक निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए सिर्फ टैक्स सुधार काफी नहीं है।

कुल मिलाकर, सर्वे में सामने आई राय सकारात्मक दिशा में है। 51% उत्तरदाताओं का मानना है कि भारत में क्रिप्टो को एक नए एसेट क्लास के तौर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

*पूरा सर्वे रिपोर्ट यहां देखें:* https://coinswitch.co/switch/wp-content/uploads/2026/01/Tax-Survey-Report-2026.pdf

deshpatrika

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