जेके टायर रैली ऑफ हिमालयाज़ 2026 का शानदार समापन, जोश, रफ्तार और हिमालयी सहनशक्ति का दिखा शानदार प्रदर्शन
मनाली से पदुम (ज़ांस्कर), 1 अक्टूबर 2026: जेएंडके बैंक प्रस्तुत जेके टायर रैली ऑफ हिमालयाज़ 2026, देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रैली प्रतियोगिताओं में से एक, 30 सितंबर को चार दिनों से अधिक समय तक चली रोमांचक प्रतियोगिता के बाद संपन्न हुई। लाहौल-स्पीति और ज़ांस्कर के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों से गुजरने वाली इस रैली में 50 कारों और 80 राइडर्स ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने भारत के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय मार्गों पर अपनी कुशलता, सटीकता, सहनशक्ति और पल-पल सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगियों को कठिन हिमालयी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्हें खड़ी चढ़ाइयों, तेज रफ्तार वाले रास्तों, अप्रत्याशित मौसम और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों से होकर गुजरना पड़ा, जिससे वाहनों और राइडर्स दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। तकनीकी चरणों से लेकर चुनौतीपूर्ण मार्ग पर रास्ता पहचानने तक, इस वर्ष की रैली ने एक सच्ची रैली प्रतियोगिता के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत किया, जहां प्रतिभागियों की रफ्तार के साथ-साथ निरंतरता की भी परीक्षा हुई।
मनाली से शुरुआत और लाहौल-स्पीति की चुनौती
रैली की शुरुआत 26 सितंबर 2026 को मनाली से हुई। इसके बाद अगले कुछ दिनों तक प्रतिभागियों ने लाहौल और स्पीति के दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए अपनी सहनशक्ति और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। रैली के मार्ग में कुंजुम ला जैसे प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण हिमालयी रास्ते भी शामिल थे, जो कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण ड्राइविंग के लिए जाने जाते हैं।
जैसे-जैसे रैली आगे बढ़ी, प्रतियोगिता और भी कड़ी होती गई। टीमों और राइडर्स को अपनी गति को नियंत्रित करने के साथ-साथ ऊंचाई और दुर्गम रास्तों के प्रभाव से अपने वाहनों और उपकरणों को सुरक्षित रखना पड़ा। ऐसे कठिन इलाकों में छोटी-सी तकनीकी खराबी भी किसी टीम की पूरी चुनौती को समाप्त कर सकती थी।
रेस में शुरुआती बढ़त: राजीव यादव ने बनाई मजबूत पकड़
रैली के पहले ही दिन राजीव यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त हासिल की। शुरुआती चरणों में उन्होंने लगातार अपनी गति और लय बनाए रखी। इस दौरान उन्होंने मजबूत स्थानीय प्रतियोगी आर्यक राणा पर भी नजर बनाए रखी, जो शुरुआती चरण में प्रमुख दावेदारों में शामिल रहे।
जैसे-जैसे रैली तकनीकी रूप से और चुनौतीपूर्ण होती गई, अपनी स्थिति बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण हो गया जितना कि अधिकतम गति हासिल करना। प्रतियोगियों ने अनुशासित प्रदर्शन किया और स्टैंडिंग्स में उन प्रतिभागियों की स्थिति मजबूत होने लगी, जो कठिन चरणों में रफ्तार और निरंतरता दोनों बनाए रखने में सफल रहे।
72 किलोमीटर के विशेष चरण और विपरीत दिशा में रैली ने बढ़ाई चुनौती
रैली में 72 किलोमीटर का एक विशेष प्रतिस्पर्धी चरण शामिल था, जिसे बाद में विपरीत दिशा में आयोजित किया गया। इस प्रारूप ने प्रतियोगियों के सामने एक नई चुनौती पेश की। परिचित मार्ग को विपरीत दिशा से तय करने के लिए उन्हें अपने ब्रेक लगाने के स्थान, मोड़ लेने का समय और गति की रणनीति में बदलाव करना पड़ा।
रैली के महत्वपूर्ण क्षणों में से एक तब आया जब 2015 के रेड डी हिमालय के विजेता लखपा त्सेरिंग को तकनीकी समस्या के कारण अपनी टोयोटा हिलक्स के साथ प्रतियोगिता से हटना पड़ा। उनका बाहर होना इस बात को दर्शाता है कि ऊंचाई वाले इलाकों में होने वाली रैली प्रतियोगिताओं में ड्राइविंग कौशल के साथ-साथ वाहन की तकनीकी विश्वसनीयता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
लॉसर से शिंकू ला तक दक्ष गिल का दबदबा
विपरीत दिशा में आयोजित चरण के बाद रैली का रुख दक्ष गिल की ओर हुआ। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अगले दो चरणों में जीत हासिल की, जिसकी शुरुआत विपरीत दिशा में आयोजित लॉसर से ग्राम्फू चरण से हुई।
इसके बाद प्रतियोगिता शिंकू ला की ओर बढ़ी, जहां मार्ग 16,500 फीट से अधिक की ऊंचाई तक पहुंचा। इतनी ऊंचाई पर केवल रफ्तार पर्याप्त नहीं होती। वाहन पर नियंत्रण, पहियों की पकड़ बनाए रखना और गति बढ़ाने वाले यंत्र का सावधानी से इस्तेमाल करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इन कठिन परिस्थितियों में अपनी गति बनाए रखने की गिल की क्षमता ने रेस के परिणाम को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ज़ांस्कर घाटी: ऊंचाई पर रफ्तार की कठिन परीक्षा
इसके बाद रैली ज़ांस्कर घाटी में पहुंची, जहां के दुर्गम भूभाग ने प्रतियोगिता का एक बेहद चुनौतीपूर्ण चरण पेश किया। प्रतिभागियों को क्षेत्र के कठिन और ऊंचाई वाले रास्तों पर तेज रफ्तार से आगे बढ़ना पड़ा। यह इलाका अपने शानदार और रेगिस्तान जैसे भू-दृश्य के लिए जाना जाता है।
इस महत्वपूर्ण चरण में दक्ष गिल ने एक बार फिर अपनी रफ्तार और निरंतरता का शानदार प्रदर्शन किया। ज़ांस्कर के रास्ते पर उन्होंने 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल की, जो हिमालयी रैली में आवश्यक गति, नियंत्रण और सटीकता के बेहतरीन तालमेल को दर्शाती है।
ज़ांस्कर का यह चरण प्रतियोगिता की स्थिति के लिए निर्णायक साबित हुआ और इसने एक बार फिर यह साबित किया कि बेहद कठिन भूभाग में केवल तेज रफ्तार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रफ्तार के साथ वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
पदुम में समापन: ज़ांस्कर में उपलब्धियों का जश्न
रैली का समापन पदुम, जो ज़ांस्कर जिले का मुख्यालय है, में हुआ। इसके साथ ही हिमालय के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में चार दिनों से अधिक समय तक चली कठिन और रोमांचक प्रतियोगिता का समापन हुआ।
प्रतियोगियों, आयोजकों और समर्थकों ने उन राइडर्स और उनकी टीमों के प्रयासों का सम्मान किया, जिन्होंने कठिन मार्ग को सफलतापूर्वक पूरा किया और ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया, जिनका सामना बहुत कम मोटरस्पोर्ट प्रतियोगिताओं में देखने को मिलता है।
विभिन्न श्रेणियों के विजेता और पोडियम पर स्थान हासिल करने वाले प्रतिभागी
मोटो (दो पहिया)
विजेता: धृतिमान सिंह
उपविजेता: हैप्पी वर्मा
द्वितीय उपविजेता: नितीश भारद्वाज
एक्सट्रीम (चार पहिया)
विजेता: राजीव यादव / रोहित गौड़ा
उपविजेता: आर्यक राणा / आदित्य शर्मा
द्वितीय उपविजेता: दक्ष गिल / वीरेंद्र कश्यप
एडवेंचर (चार पहिया)
विजेता: सोहम हजरा / निरव मेहता
उपविजेता: संतोष एचएम / प्रकाश मुथुसामी
द्वितीय उपविजेता: चंद्र मौली / श्री शक्ति कुमार एन
तीसरा स्थान: सचिन मंधवानी / अधित्य एंथनी
पुरस्कार वितरण समारोह और सांस्कृतिक संध्या
रैली प्रतियोगिता के समापन के बाद एक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने शाम को और खास बना दिया। इस अवसर पर प्रतियोगियों की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया और हिमालय की गर्मजोशी तथा मेहमाननवाजी की झलक भी देखने को मिली।
समारोह में कई गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की, जिनमें शामिल रहे:
अरवा गोपी कृष्णा, आईएएस — प्रशासनिक सचिव, परिवहन एवं आवास तथा शहरी विकास
मोजेस कुंजांग — मुख्य सचिव के स्टाफ अधिकारी
त्सेवांग दोरजाई — उप महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख, जेएंडके बैंक
रिगज़िन संगदुप — पुलिस अधीक्षक, ज़ांस्कर
गुलाम मोहम्मद — मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पर्यटन विकास प्राधिकरण / अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त, कारगिल
सरवर शहज़ाद — उप मंडल मजिस्ट्रेट, ज़ांस्कर
