वैश्विक पैनल ने ग्लोबल साउथ में एआई के क्षेत्र में महिला उद्यमशीलता की ओर दृष्टिकोण बदलने का आह्वान किया

वैश्विक पैनल ने ग्लोबल साउथ में एआई के क्षेत्र में महिला उद्यमशीलता की ओर दृष्टिकोण बदलने का आह्वान किया
  • ब्रिक्स सीसीआई डब्लूई ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में एआई को लोकतांत्रिक बनाने का समर्थन किया

नई दिल्ली, 18 फरवरी, 2026- यहां भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की महिला सशक्तिकरण इकाई ब्रिक्स सीसीआई डब्लूई द्वारा आयोजित एक वैश्विक पैनल में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकला कि नवप्रवर्तन और उद्यमशीलता के माध्यम से लैंगिक समानता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लोकतांत्रिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक है। “क्रियान्वयन करने वालों से नवप्रवर्तकों तकः एआई में महिला उद्यमशीलता की दिशा में दृष्टिकोण बदलने का आह्वान” विषय पर चर्चा के दौरान उपक्रम लगाने और पारिस्थितिकी नेतृत्व में महिलाओं को केंद्र में रखा गया। इस सत्र में वैश्विक नेता, उद्यमी, निवेशक और पारितंत्र निर्माताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे एआई को समावेशी प्रतिभाग और महिलाओं के नेतृत्व में नवप्रवर्तन के जरिए लोकतांत्रिक बनाया जा सकता है।

स्वागत भाषण देते हुए ब्रिक्स सीसीआई के वाइस चेयरमैन श्री समीप शास्त्री ने एआई में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और समावेशी नवप्रवर्तन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आज भारत वैश्विक एआई पारितंत्र में एक मजबूत आवाज के तौर पर उभर रहा है। एआई को महज शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि समावेशी भी होना आवश्यक है। जैसा कि भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करने जा रहा है, हमारा लक्ष्य टेक्नोलॉजी, डिजिटल नवप्रवर्तन, उद्यमशीलता और जिम्मेदार एआई विकास में सहयोग मजबूत करना है।”

ब्रिक्सी सीसीआई डब्लूई (महिला सशक्तिकरण) की अध्यक्ष और शीएटवर्क की संस्थापक सुश्री रूबी सिन्हा ने एआई के उद्भव के मौजूदा चरण को नए सिरे से परिभाषित कर माहौल बनाते हुए कहा, “एआई अब भावी टेक्नोलॉजी नहीं रह गया है, बल्कि यह मौजूदा परिदृश्य के आधारभूत ढांचे में समाहित है। भारत की एआई की यात्रा अपने व्यापक स्तर, नवप्रवर्तन और प्रभाव को लेकर विश्व का ध्यान खींच रही है। माननीय प्रधानमंत्री के विजन के मुताबिक, मौजूदा एआई समिट 2026 का ध्यान टेक्नोलॉजी के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने पर है जिसमे लिंग समानता पर विशेष ध्यान है। दशकों से महिलाएं महज पहुंच की मांग कर रही थीं। आज हम उस टेबल पर एक सीट मांगने के बजाय स्वयं टेबल को डिजाइन करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।”

प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों में महिलाओं के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए गाइया की सह संस्थापक और सीईओ सुश्री अमृता चौधरी ने कहा, “हम उद्यमशीलता और टेक्नोलॉजी में एक ऐतिहासिक क्षण में खड़े हैं। जहां करीब 20 प्रतिशत स्टार्टअप्स और एमएसएमई का नेतृत्व महिलाएं करती हैं, उनका प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। महिलाएं ना केवल एआई को अपना रही हैं, बल्कि फिनटेक, रिटेल सप्लाई चेन और शहरी आधारभूत ढांचा जैसे क्षेत्रों में एप्लीकेशंस का सक्रिय रूप से निर्माण कर उसे गति दे रही हैं। नवप्रवर्तन में वास्तविक जीवन की झलक दिखनी चाहिए। एआई प्रणालियों में लिंग संवेदनशील डेटा को शामिल कर हम ऐसे मोबिलिटी, शहरों और सॉल्यूशंस का निर्माण कर सकते हैं जो सुरक्षित, अधिक स्मार्ट और समावेशी हों।”

एक वैश्विक सहयोग का दृष्टिकोश पेश करते हुए एआई रेगुलेशन एंड इंटरनेशनल कोऑपरेशन, बरबैंक की कार्यकारी निदेशक सुश्री एलविरा शाचे ने कहा, “लिंग असमानता दूर करने के लिए यह जरूरी है कि महिलाएं ना केवल उद्यमशीलता के स्तर पर बल्कि विधायी स्तर पर भी मौजूद रहें। ग्लोबल साउस के देशों को महिला नवप्रवर्तकों के लिए समुदायों का गठन करने की जरूरत है ताकि वे डेटा सहित संसाधन साझा कर सकें। हम एआई में महिला उद्यमशीलता की दिशा में धीरे धीरे बदलाव होते देख रहे हैं। उद्योग निकाय और संस्थान अब नवप्रवर्तकों को अनुदान और शुरुआती पूंजी उपलब्ध करा रहे हैं जो प्रभाव बढ़ाने के लिए आवश्यक है।”

स्टार्टअप पारितंत्र के दृष्टिकोण से ग्रोथक्यूआर के संस्थापक और पेसियो के सह संस्थापक श्री बिबिन बाबू ने कहा, “महिलाएं पहले से ही एआई के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का एहसास करा रही हैं। मैं आज महिलाओं के नेतृत्व वाले कई स्टार्टअप्स में टिकाऊपन और उन समस्याओं पर स्पष्टता से खास जोर देख रहा हूं जिन्हें हल किया जा रहा है। वे शुरुआती चरण में ही सत्यापन करते हैं, लगातार अनुकूल करते हैं और मूल्यांकन के पीछे पड़ने के बजाय आय पर ध्यान केंद्रित करते हैं। एजेंटिक एआई में संदर्भ और जिम्मेदारी कहीं ज्यादा मायने रखती है और महिला संस्थापक मॉडलों के निर्माण में दीर्घकालीन सोच को शामिल कर रही हैं। महिलाओं को एआई में नेतृत्व के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है। हमें उसकी जरूरत है जिसका आप (महिलाएं) निर्माण कर रही हैं। बाहर निकलिए और निर्माण करिए।”

ग्लोबल साउथ का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (इंस्टीट्यूटो प्लस मुलहेरेस) की निदेशक और एआई रियो 2026 की संस्थापक व को-क्यूरेटर सुश्री नैजिला गुइमाराएस ने कहा, “एआई को लोकतांत्रिक बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं ना केवल एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित हों, बल्कि कंपनियों के निर्माण, नीति पर प्रभाव डालने और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों का नेतृत्व करने में उनका सहयोग किया जाए। लैटिन अमेरिका और सभी ब्रिक्स देशों में हम महिला संस्थापकों के बीच जबरदस्त गति देख रहे हैं। हमें अब जिस चीज की जरूरत है वह है सीमा पार मार्गदर्शन, साझा अनुसंधान और फंडिंग पाइपलाइनों तक पहुंच जिससे महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स वैश्विक स्तर पर बढ़ सकें।”

जमीनी स्तर पर नवप्रवर्तन को लेकर थिंकस्टार्टअप की सह संस्थापक सुश्री शिवानी सिंह कपूर ने यूथ इन्नोवेशन प्रोग्राम्स से जबरदस्त आंकड़े पेश करते हुए कहा, “पिछले पांच वर्षों में हमारी अखिल भारतीय नवप्रवर्तन प्रतियोगिता में लड़कियों की भागीदारी 45 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वे बुजुर्गों के वियरेबल्स से लेकर ड्रोन आधारित बायो-डिकंपोजर तक में एआई संचालित सॉल्यूशंस प्रदान कर रही हैं। इन निर्माताओं को आने वाले कल के उद्यमियों में तब्दील करने के लिए हमें स्कूल और कॉलेज के हस्तक्षेप, बाजार के रास्ते और संरचित वर्टिकल चुनौतियों की जरूरत है जहां भारत की रचनात्मकता वैश्विक एआई बढ़त में प्रतिस्पर्धा कर सके।” 

अपने समापन संबोधन में ब्रिक्स सीसीआई वुमेन एंपावरमेंट की अध्यक्ष और शीएटवर्क की संस्थापक सुश्री रूबी सिन्हा ने महिलाओं के प्रतिभाग करने से लेकर नेतृत्व करने तक की यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे महिलाएं केवल एआई टूल्स को अपनाने वाली नहीं रह गई हैं, बल्कि वे एआई पारितंत्र की आर्किटेक्ट्स के तौर पर स्थापित हो रही हैं। इससे एआई में समावेशी नवप्रवर्तन हो रहा है।

परिचर्चा में शामिल ब्रिक्स सीसीआई की संयुक्त निदेशक अंकिता सचदेव और ब्रिक्सी सीसीआई से अन्य प्रतिनिधियों ने एक अहम बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एआई अब एक काल्पनिक टेक्नोलॉजी या प्रयोगात्मक टूल नहीं रह गया है। यह आधारभूत ढांचा है। अब प्रश्न यह नहीं रह गया कि क्या एआई अर्थव्यवस्थाओं को आकार देगा, बल्कि यह है कि एआई को कौन आकार देगा।

ब्रिक्स सीसीआई के बारे में

ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ब्रिक्स सीसीआई) एक मूल संगठन है जो ब्रिक्स और अन्य मित्र देशों में वाणिज्य एवं उद्योग को प्रोत्साहन देता है। प्रख्यात पेशेवरों और उद्यमियों के प्रयासों से 2012 में स्थापित यह चैंबर एक गैर लाभकारी और गैर सरकारी संगठन है। ब्रिक्स सीसीआई भारत सरकार के सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत एक निकाय है और यह नीति आयोग (भारत सरकार के उच्चतम निर्णयकर्ता निकाय) के पैनल में है और इसे संयुक्त राष्ट्र ने मान्यता दी है। यह चैंबर ब्रिक्स देशों और अन्य मित्र देशों के बीच संस्थागत संपर्क और कारोबारी संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए समय समय पर व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, संगोष्ठियों, व्याख्यानों और कारोबारी अभियानों का आयोजन करता है।

ब्रिक्स सीसीआई की महिला सशक्तिकरण इकाई ब्रिक्स सीसीआई डब्लूई के गठन का मुख्य उद्देश्य सभी भौगोलिक क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण की पहल और नीतियों पर खास ध्यान देना है। इस महिला इकाई का उद्देश्य सभी भौगोलिक क्षेत्रों में महिला उद्यमियों और पेशेवरों के लिए सुगम सपोर्ट प्रणाली का निर्माण करना है।

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