“उम्र यह तय नहीं करती कि हमें किससे प्यार करना चाहिए”: कलर्स के ‘शायद यही है प्यार’ पर अदिति देव शर्मा
कलर्स का ‘शायद यही है प्यार’ रोमांस से जुड़ी वर्षों पुरानी धारणाओं को चुनौती देते हुए एक ताज़गीभरी प्रेम कहानी
पेश करता है, जो इस बात को परखती है कि क्या उम्र वास्तव में यह तय करनी चाहिए कि हम किससे प्यार करें। ‘दिल
बस दिल देखता है’ की सोच पर आधारित यह सीमित एपिसोड्स वाली सीरीज़ प्रीति अरोड़ा (अदिति देव शर्मा) की
कहानी है, जो 35 वर्षीय आत्मनिर्भर महिला है और जिसने वर्षों तक शादी, स्थिरता और सही उम्र में घर बसाने को लेकर
समाज की अपेक्षाओं का सामना किया है। दिल टूटने के बाद प्रीति की ज़िंदगी में आरव आता है, जो आकर्षक व्यक्तित्व
वाला और भावनात्मक रूप से परिपक्व युवा है तथा उससे दस वर्ष छोटा है। इस अनपेक्षित रिश्ते के साथ आगे बढ़ते हुए
प्रीति की यात्रा खुद को दोबारा खोजने, नई शुरुआत करने का साहस जुटाने और दुनिया को क्या सही लगता है, उससे
अधिक अपने दिल की सुनने की कहानी बन जाती है। अदिति देव शर्मा, दक्ष पुरी, कुणाल करण कपूर और ऐश्वर्या सखूजा
अभिनीत ‘शायद यही है प्यार’ प्रेम, सामाजिक धारणाओं और अपने दिल की सुनने के साहस को दर्शाता है। शो और अपने
किरदार के बारे में बात करते हुए अदिति देव शर्मा ने प्रीति और आरव के बीच उम्र के अंतर, रिश्तों को लेकर सामाजिक
सोच को चुनौती देने वाले पहलुओं और इस कहानी के उनके दिल के बेहद करीब होने की वजहों पर खुलकर अपनी बात
रखी।
- हमें अपने किरदार के बारे में बताएं।
उ. मैं प्रीति अरोड़ा का किरदार निभा रही हूं, जो 35 वर्ष की आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और मेहनती महिला है। वह
अपने पेशेवर जीवन में सफल है, लेकिन इसके बावजूद उसे अपने माता-पिता और समाज की ओर से शादी करके घर
बसाने के लिए लगातार पड़ने वाले परिचित दबाव का सामना करना पड़ता है, साथ ही दफ्तर की राजनीति भी झेलनी
पड़ती है। उसने गौरव के साथ पांच साल बिताए हैं और उसे लगता है कि वह आखिरकार उस जीवन की ओर बढ़ रही है,
जिसे बनाने की उससे हमेशा उम्मीद की गई थी। लेकिन गौरव की यूपीएससी पोस्टिंग के बाद उसमें बदलाव आ जाता है
और उनका रिश्ता विश्वासघात के साथ खत्म हो जाता है। प्रीति के लिए यह ऐसा पल बन जाता है, जब वह उन सभी
बातों पर सवाल उठाने लगती है जिन्हें वह अब तक अपनी चाहत समझती थी। वह यह भी सोचने पर मजबूर हो जाती है
कि क्या वह अपने लिए फैसले ले रही थी या अपने आसपास के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए। फिर उसकी
ज़िंदगी में आरव आता है। वह 25 साल का है, यानी उससे दस साल छोटा, और उसका जीवन में आना पूरी तरह
अप्रत्याशित है। लेकिन उसके साथ प्रीति खुद को ऐसे समझा हुआ और सहज महसूस करती है, जैसा उसने पहले कभी
महसूस नहीं किया था। मुझे लगता है कि यही बात उसकी कहानी को इतना प्रासंगिक बनाती है। 35 साल की उम्र में भी
उसे खुद को खोजने, जोखिम लेने और प्यार करने का पूरा अधिकार है, भले ही जिस व्यक्ति से उसे प्यार हो, वह
पारंपरिक सोच के अनुसार उपयुक्त जीवनसाथी की परिभाषा में फिट न बैठता हो। उसकी यात्रा वास्तव में अपनी खुशी
को सबसे पहले रखने का आत्मविश्वास पाने की कहानी है। - दक्ष पुरी के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
उ. यह एक बेहद शानदार अनुभव रहा। हमारी कहानी में प्रीति और आरव के बीच भावनात्मक ईमानदारी की बहुत
ज़रूरत है, इसलिए दक्ष के साथ सहज और भरोसेमंद तालमेल होना बेहद महत्वपूर्ण था। वह हमेशा इस बात का ध्यान
रखते हैं कि मैं सहज महसूस करूं, जिससे हमारे लिए साथ काम करना आसान हो जाता है। जिस बात ने मुझे सबसे
ज्यादा प्रभावित किया है, वह उनका आत्मविश्वास है, खासकर यह देखते हुए कि यह उनका पहला शो है। जब मैं उनकी
उम्र की थी, तब मुझे नहीं लगता कि मैं उतनी आत्मविश्वासी थी, जितने वह आज हैं। वह आरव के किरदार में एक
खूबसूरत ताज़गी, सच्चाई और परिपक्वता लेकर आते हैं, जिसकी वजह से स्क्रीन पर उनका रिश्ता बेहद स्वाभाविक महसूस
होता है। काम के अलावा भी, वह उन बेहतरीन इंसानों में से एक हैं जिनसे मैं मिली हूं। उनके साथ काम करना और इन
किरदारों को साथ मिलकर समझना मेरे लिए वास्तव में एक बेहद सुखद अनुभव रहा है।
- इस शो में अपने को-एक्टर्स के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
उ. मेरे सह-कलाकारों के साथ काम करना ईमानदारी से कहूं तो इस पूरी यात्रा के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक रहा
है। कुणाल के साथ काम करना बेहद शानदार रहा है और उनके साथ स्क्रीन साझा करने का मैंने वास्तव में भरपूर आनंद
लिया है। ऐश्वर्या, जो मेरी सबसे अच्छी दोस्त और सोल सिस्टर संध्या का किरदार निभा रही हैं, ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें
मैं बेहद पसंद करती हूं। उन्हें सैंडी के किरदार में देखकर अक्सर मुझे लगता है कि मेरी निजी ज़िंदगी में भी एक ‘सैंडी’
होनी चाहिए। वह सेट पर बहुत सारी गर्मजोशी और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती हैं। ग्रूशा और विनोद, जो मेरे माता-
पिता का किरदार निभा रहे हैं, उनके साथ काम करना मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं रहा है। वे अपने साथ अनुभव
और समझ का गहरा खजाना लेकर आते हैं, और मैं खुद को वास्तव में सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उनके साथ रहने
और हर दिन उनसे सीखने का अवसर मिलता है। मैं दिल से खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मेरे आसपास इतनी
शानदार टीम है। इस शो का हर दिन मुझे कुछ नया सिखाता है। मैं सिर्फ अपने काम का ही नहीं, बल्कि उन लोगों का भी
आनंद ले रही हूं जिनके साथ मैं काम कर रही हूं, और उस खूबसूरत सफर का भी, जिसे हम सभी मिलकर बना रहे हैं। - ‘शायद यही है प्यार’ में अपने किरदार के लिए आपने कैसे तैयारी की?
उ. प्रीति के किरदार की तैयारी मेरे लिए काफी व्यक्तिगत रही, क्योंकि मैं खुद भी जीवन के उस पड़ाव पर रही हूं, जहां
लोग एक महिला की उम्र के साथ कई तरह की अपेक्षाएं जोड़ने लगते हैं। इस भूमिका की तैयारी के दौरान मैंने कोरियन
ड्रामा ‘समथिंग इन द रेन’ भी देखा, जिसने मुझे कहानी की बारीकियों और किरदारों की भावनाओं को बेहतर ढंग से
समझने में मदद की। मैं जानती हूं कि कैसा महसूस होता है जब लोग यह मान लेते हैं कि एक निश्चित उम्र तक आपकी
निजी ज़िंदगी पूरी तरह से व्यवस्थित हो जानी चाहिए और आपको सभी ‘सही’ फैसले ले लेने चाहिए। इसलिए कई
मायनों में, प्रीति जिस दौर से गुजर रही है, उसे समझने के लिए मुझे बहुत दूर देखने की जरूरत नहीं पड़ी। जिस पहलू को
मैं सबसे गहराई से समझना चाहती थी, वह यह था कि 35 साल की उम्र में, उस रिश्ते को अपना भविष्य मानने के बाद
जिसमें आपने पांच साल लगाए हों, दोबारा नई शुरुआत करना भावनात्मक रूप से कैसा होता है। इसके साथ एक तरह
की संवेदनशीलता और असुरक्षा जुड़ी होती है, भले ही आप एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर महिला ही क्यों न हों।
फिर आरव है, जो उससे दस साल छोटा है, और अचानक प्रीति को अपने आसपास के लोगों के बिल्कुल अलग तरह के
सवालों का सामना करना पड़ता है। मैं यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि उनके बीच का उम्र का अंतर कभी भी किसी
दिखावटी तत्व या आकर्षण का साधन न लगे। प्रीति के लिए यह बस उस इंसान को पाने की कहानी है, जिसके साथ वह
खुद को समझा हुआ और खुश महसूस करती है। मुझे लगता है कि जीवन के अलग-अलग चरणों से गुजरने के मेरे अपने
अनुभव ने मुझे यह समझने में मदद की कि खुद को खोजने या प्यार पाने की कोई तय उम्र नहीं होती। - आम रोमांटिक ड्रामा से अलग, ‘शायद यही है प्यार’ प्यार को एक नए नज़रिए से दिखाता है और खूबसूरती से इस
बात को सामने लाता है कि उम्र सिर्फ़ एक नंबर है। अब जब यह शो ऑन-एयर हो चुका है, तो आपको क्या लगता है कि
दर्शक इस अनोखे कॉन्सेप्ट और इसके पीछे के संदेश पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं?
उ. मुझे लगता है कि इस शो को खास बनाने वाली बात यह है कि यह सिर्फ यह नहीं कहता कि उम्र महज़ एक संख्या है,
बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर हम उम्र को यह तय करने की इजाज़त क्यों देते हैं कि कोई
रिश्ता सही है या गलत। प्रीति और आरव का रिश्ता भले ही पारंपरिक सोच से अलग हो, लेकिन जिन भावनाओं से वे
गुजरते हैं, जैसे प्यार, साथ, असुरक्षा, संवेदनशीलता और समझे जाने की चाह, वे पूरी तरह सार्वभौमिक हैं। प्रीति ने वर्षों
तक खुद को समाज की बनाई कसौटियों पर परखा जाता हुआ देखा है, जबकि आरव उसे इन सभी सीमाओं से परे देखकर
स्वीकार करता है और उसे यह एहसास दिलाता है कि वह समझी जा रही है, सुरक्षित है और खुश है। यह देखकर बेहद
अच्छा लगा है कि दर्शक इन भावनाओं से जुड़ रहे हैं और प्रीति की उस यात्रा को अपना रहे हैं, जिसमें वह दुनिया को क्या
सही लगता है, उससे ज्यादा उस बात को महत्व देती है जो उसे सही महसूस होती है। आखिरकार, मुझे लगता है कि यह
शो हमें याद दिलाता है कि जब बात प्यार की आती है, तो दिल बस दिल देखता है।
- यह कहानी दिल्ली पर आधारित है और आपने वहाँ शूटिंग में काफी समय बिताया है। आपके लिए वह अनुभव कैसा
रहा?
उ. दिल्ली में शूटिंग करना एक शानदार अनुभव रहा, क्योंकि यह शहर हमारे शो का बेहद अहम हिस्सा है और हमारे
किरदारों तथा उनकी दुनिया को वास्तविकता प्रदान करता है। चूंकि प्रीति और आरव, दोनों का दिल्ली से गहरा जुड़ाव
है, इसलिए वास्तविक लोकेशन्स पर शूटिंग करने से हमें ऐसी दुनिया रचने में मदद मिली, जो स्वाभाविक, वास्तविक और
दर्शकों से जुड़ाव महसूस कराने वाली लगे। शहर से आरव की गहरी पहचान भी उसके किरदार और उसकी यात्रा में एक
नया आयाम जोड़ती है। - ‘शायद यही है प्यार’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कोरियन ड्रामा ‘समथिंग इन द रेन’ से अडैप्ट किया गया है। ऐसी
कहानी का हिस्सा बनना कैसा रहा, जिसे दुनिया भर के दर्शकों ने पहले ही पसंद किया है?
उ. जब हमें यह पता चला कि हम आधिकारिक तौर पर इस शो का रूपांतरण कर रहे हैं, तो हम सभी बेहद खुश थे। ऐसी
कहानी का हिस्सा बनना बेहद रोमांचक है, जिसने पहले ही दुनिया भर के दर्शकों के साथ जुड़ाव बनाया है, और साथ ही
उसे भारतीय परिवेश में प्रस्तुत करना भी एक खास अनुभव है। प्यार, दिल टूटना, रिश्ते और सामाजिक अपेक्षाओं जैसी
भावनाएं सार्वभौमिक हैं, लेकिन हमारे किरदारों, परिस्थितियों और रिश्तों को भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक
वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए रूपांतरित किया गया है। मुझे लगता है कि वैश्विक स्तर पर पसंद किए गए इस
कॉन्सेप्ट और भारतीय दर्शकों से जुड़ाव महसूस कराने वाली प्रस्तुति के बीच का यही संतुलन ‘शायद यही है प्यार’ को
खास बनाता है। - शायद यही है प्यार’ अब ऑनएयर हो गया है। प्रीति और आरव की कहानी सामने आने पर दर्शक क्या उम्मीद कर
सकते हैं?
उ. शो अब ऑन-एयर है और पहले पांच एपिसोड्स के प्रसारित होने के बाद मुझे लगता है कि दर्शकों को प्रीति और आरव
की दुनिया तथा उनके बीच बने उस अनपेक्षित जुड़ाव की एक झलक मिल चुकी है। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत है। दर्शक
देखेंगे कि कैसे प्यार अपना रास्ता बना लेता है, भले ही उसके सामने समाज, परिस्थितियां और उम्र जैसी बाधाएं क्यों न
हों। प्रीति की यह यात्रा खुद को दोबारा खोजने, अपनी खुशी को चुनने का साहस पाने और एक बार फिर प्यार पर
भरोसा करना सीखने की भी कहानी है। इसलिए, अगर आपने अभी तक पहले पांच एपिसोड्स नहीं देखे हैं, तो उन्हें मिस
मत कीजिए। आगे कहानी में बहुत कुछ देखने को मिलेगा और मैं भी उत्साहित हूं कि दर्शक देखें कि प्रीति और आरव की
कहानी किस तरह आगे बढ़ती है। आखिरकार, दिल बस दिल देखता है।
देखिए ‘शायद यही है प्यार’, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:30 बजे, सिर्फ कलर्स और जियोहॉटस्टार पर।
