स्टडीज के मुताबिक न्यूट्रिशन सप्लीमेंट भारत में पोषण की कमी वाले बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास तथा हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं

स्टडीज के मुताबिक न्यूट्रिशन सप्लीमेंट भारत में पोषण की कमी वाले बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास तथा हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं
  • न्यूट्रिशन की कमी वाले जिन बच्चों को ओरल न्यूट्रिशन सप्लीमेंट दिया गया, उनमें केवल डाइटरी काउंसलिंग वाले बच्चों के मुकाबले लंबाई लगभग 2.4 गुना बढ़ी और लीन मास लगभग 15% बढ़ा।
  • स्टडीज में केवल ऊंचाई और वजन के अलावा विकास की क्वालिटी (लीन मास और बोन हेल्थ) में भी सुधार देखा गया।

अगस्त 2026 ग्लोबल हेल्थकेयर लीडर, Abbott ने एक रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के नतीजे जारी किए हैं। इन नतीजों के मुताबिक भारत में जिन बच्चों को पोषण की कमी का खतरा है, उनमें केवल डाइटरी काउंसलिंग वाले बच्चों की बजाय डाइटरी काउंसलिंग के साथ ओरल न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट देने पर शारीरिक और मानसिक विकास में काफी सुधार देखा गया। जिन बच्चों को छह महीनों तक सप्लीमेंट दिया गया, उनकी लंबाई लगभग 2.4 गुना बढ़ी और लीन मास में लगभग 15% वृद्धि हुई।[1],[2]

जर्नल्स चिल्ड्रन और जर्नल ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन में प्रकाशित यह ट्रायल 3 से 7 साल की उम्र के 223 भारतीय बच्चों पर किया गया, जिन्हें खाने-पीने की आदतों के कारण या तो न्यूट्रिशन की कमी थी या इसका खतरा था।

स्टडी में शामिल परिवारों और बच्चों को छह महीने तक डाइटरी काउंसलिंग दी गई। लगभग आधे बच्चों को Abbott पीडियाट्रिक ओरल न्यूट्रिशन सप्लीमेंट, पीडियाश्योर की रोज दो सर्विंग दी गईं। इसके बाद पहले से निर्धारित समय अंतरालों पर उनके विकास, डाइट, बॉडी कंपोजिशन और अन्य हेल्थ इंडिकेटर्स का आकलन किया गया।

ड्युअल-एनर्जी एक्स-रे एबसॉर्प्शियोमेट्री (डीएक्सए) की मदद से बॉडी कंपोजिशन और बोन हेल्थ का मूल्यांकन किया गया, जो इमेजिंग बेस्ड मेजरमेंट का गोल्ड-स्टैंडर्ड है तथा लीन मास, फैट मास और बोन मिनरलाइजेशन का सटीक माप प्रदान करता है। लीन मास में बॉडी फैट को छोड़कर मांसपेशियां, हड्डियां, सभी अंग और बॉडी कंपोनेंट्स आते हैं।

मुख्य नतीजे:

  • अच्छे शारीरिक विकास और बेहतर बोन हेल्थ के संकेत: सप्लीमेंट ग्रुप वाले बच्चों की ऊँचाई, वजन और लीन मास में सुधार देखा गया, पर उम्र के हिसाब से बीएमआई और डीएक्सए मेजरमेंट में अधिक फैट भी जमा नहीं हुआ। डीएक्सए में बोन मिनरल डेंसिटी (35%) और बोन मिनरल कंटेंट में भी वृद्धि दर्ज हुई।
  • कैच-अप वृद्धि: न्यूट्रिशन की कमी वाले वो बच्चे, जिन्हें सप्लीमेंट दिया गया, उनमें केवल डाइटरी काउंसलिंग पाने वाले बच्चों की तुलना में छह महीने में वजन और उम्र तथा ऊंचाई और उम्र प्रतिशत में 4 गुना अधिक वृद्धि देखी गई।[3] प्रतिशत मात्रा प्रदर्शित करती है कि एक बच्चा उसी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में कैसी वृद्धि कर रहा है। ये सुधार स्वस्थ विकास की ओर तेजी से बढ़ने का संकेत देते हैं, जो मजबूत कैच-अप विकास को दर्शाता है।
  • लीन मास में बेहतर वृद्धिः सप्लीमेंट ग्रुप वाले बच्चों के लीन मास में ज्यादा वृद्धि हुई, जिससे प्रदर्शित होता है कि सेहतमंद विकास के साथ मांसपेशियों और शरीर की पूरी शक्ति में भी सुधार हुआ।
  • बेहतर डायटरी इनटेकः जिन बच्चों को सप्लीमेंट दिया गया, उनमें तीन महीनों में ज्यादा ऊर्जा, कार्बोहाईड्रेट और प्रोटीन इनटेक देखा गया, जिनमें छः महीनों में और ज्यादा सुधार हुआ। उन्होंने मध्य और ऊपरी बाँह की गोलाई में भी सुधार प्रदर्शित किया, जो बेहतर न्यूट्रिशन का संकेत है।

डॉ. अनुराधा खादिलकर, कंसल्टैंट पीडियाट्रिशियन, जहाँगीर क्लिनिकल डेवलपमेंट सेंटर प्राईवेट लिमिटेड, पुणे, भारत ने कहा, ‘‘यह रिसर्च टारगेटेड न्यूट्रिशन सपोर्ट की मदद से न्यूट्रिशन की कमी को तुरंत दूर करने के महत्व को प्रदर्शित करती है। लेकिन इस रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि इसके फायदे केवल शारीरिक वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें लीन मास और बोन हैल्थ में होने वाला सुधार भी शामिल है, जो न्यूट्रिशन के जोखिम वाले बच्चों में स्वस्थ विकास को लेकर ज्यादा व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है।’’

न्यूट्रिशन और बच्चों का विकास

डॉ. प्रीति ठकोर, डायरेक्टर मेडिकल एवं साईंटिफिक अफेयर्स, Abbott न्यूट्रिशन बिजनेस, इंडिया ने कहा, ‘‘यह स्टडी इस बात के बढ़ते हुए प्रमाणों को सपोर्ट करती है कि टारगेटेड न्यूट्रिशनल सपोर्ट से न्यूट्रिशन के जोखिम वाले बच्चों के स्वस्थ विकास में मदद मिलती है। इन नतीजों ने न केवल ऊँचाई और वजन में सुधार प्रदर्शित किया है, बल्कि उनके लीन मास और बोन हैल्थ में भी सुधार हुआ है, जो विकास के नतीजों का ज्यादा विस्तृत दृष्टिकोण प्रदान करता है।’’

Abbott की पीडियाश्योर का समर्थन 30 सालों में 20 से अधिक क्लिनिकल अध्ययन कर चुके हैं। इन अध्ययनों में सामने आया है कि जिन बच्चों को न्यूट्रिशन का जोखिम है या जिनका विकास धीरे-धीरे हो रहा है, उन्हें पीडियाश्योर से स्वस्थ विकास करने में मदद मिलती है।

बचपन में होने वाली न्यूट्रिशन की कमी भारत में जनस्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या है। नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (एन.एफ.एच.एस-6, 2023-24) के डेटा में सामने आया कि देश में 5 साल से कम उम्र के 29.3 प्रतिशत बच्चों का विकास रुक गया है और लगभग 31.8 प्रतिशत बच्चों का वजन बहुत कम है। इससे प्रभावशाली न्यूट्रिशन उपायों की जरूरत प्रदर्शित होती है। इस संदर्भ में इन नतीजों से उन बढ़ते हुए वैज्ञानिक प्रमाणों को सपोर्ट मिलती है, जो न्यूट्रिशन की रणनीतियों का आकलन करके अपर्याप्त डाईट लेने वाले बच्चों में विकास की कमी को दूर करने में मदद कर सकते हैं।


[1] खाडिलकर ए, एवं अन्य। J Clin Med.2025;14(19):6972

[2] खाडिलकर ए, एवं अन्य। Children. 2025;12(9):1152

[3]केवल डाइटरी काउंसलिंग के मुकाबले, डाइटरी काउंसलिंग के साथ ओरल न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट लेने वाले बच्चों में वजन और उम्र एवं ऊंचाई और उम्र की परसेंटाइल के हिसाब से 6 महीने में हुई वृद्धि के आधार पर।

About the Study

The study’s six-month duration, which is longer than many comparable pediatric nutrition studies, allowed assessment of sustained growth outcomes over time. The findings were reported in two peer-reviewed publications based on the same randomized controlled trial conducted in India among 223 children ages 3 to 6 years with picky eating habits who were undernourished or at risk of undernutrition. 

“Impact of Oral Nutritional Supplementation and Dietary Counseling on Outcomes of Linear Catch-Up Growth in Indian Children Aged 3–6.9 Years: Findings from a 6-Month Randomized Controlled Trial” was published in Children on August 29, 2025. The paper reported outcomes related to linear catch-up growth, dietary intake, nutrient adequacy and anthropometric measures. Effects of Oral Nutritional Supplementation on Body Composition and Bone Health in Undernourished Children: A Randomized Controlled Study” was published in the Journal of Clinical Medicine on October 1, 2025.The paper reported outcomes related to body composition and bone health measured using DXA. The trial was conducted between August 2023 and May 2024 and was registered as CTRI/2023/04/051566. 

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