चिन्मय मिशन ने एक साथ सबसे ज़्यादा लोगों द्वारा ऑनलाइन भगवद्गीता का पाठ करने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

चिन्मय मिशन ने एक साथ सबसे ज़्यादा लोगों द्वारा ऑनलाइन भगवद्गीता का पाठ करने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

8,277 लोगों के एक साथ पाठ करने के साथ, चिन्मय मिशन ने भगवद्गीता के लिए दुनिया भर में एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

चिन्मय मिशन एक वैश्विक आध्यात्मिक और शैक्षणिक संस्था है, जो अध्ययन, सेवा और आत्म-सुधार के ज़रिए वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को फैलाती है। इस संस्था को एक साथ सबसे ज़्यादा लोगों द्वारा ऑनलाइन पाठ करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का आधिकारिक ख़िताब मिला है। वैश्विक कार्यक्रम ‘चिन्मय गीता समर्पणम्’ के दौरान कुल 8,277 लोगों ने एक साथ मिलकर भगवद्गीता के 15वें अध्याय (पुरुषोत्तम योग) का पाठ किया। इस उपलब्धि ने 5,188 लोगों के पुराने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

यह रिकॉर्ड ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ के तहत बना, जो चिन्मय आंदोलन के 75 साल पूरे होने की खुशी में साल भर चलने वाला उत्सव है। पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद की सोच से प्रेरित होकर, इस पहल का मकसद दुनिया भर के लोगों को भगवद्गीता के अमर ज्ञान से जोड़ना था ताकि सब मिलकर पाठ करें और भक्ति, विचार और आध्यात्मिक एकता का अनुभव कर सकें।

इस पहल से जुड़ने के लिए 70 से ज़्यादा देशों के 75,000 से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें से 32,000 से ज़्यादा लोग ऑनलाइन लाइव पाठ में शामिल हुए। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की कड़ी जाँच प्रक्रिया के बाद, 8,277 प्रतिभागी सभी नियमों पर खरे उतरे। यह उपलब्धि दुनिया भर के बच्चों, युवाओं, परिवारों और भक्तों के एक साथ आने से हासिल हुई। इसमें लगभग 1,000 प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का बहुत बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने न केवल कार्यक्रम को संभाला बल्कि हर उम्र के लोगों को ऑनलाइन जुड़ने और नियमों का सही से पालन करने में मदद की। चिन्मय मिशन ने इस आयोजन के टेक्नोलॉजी पार्टनर Cisco Webex का भी तहे दिल से शुक्रिया अदा किया, जिसकी मदद से 800 से ज़्यादा ऑनलाइन मीटिंग्स के ज़रिए दुनिया भर के लोग आसानी से जुड़ सके। इसके साथ ही, मिशन ने गीता परिवार, एसजीएस अवधूत दत्त पीठम और पूरे चिन्मय मिशन परिवार को उनके अटूट सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख, पूज्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा, “यह सम्मान सिर्फ एक विश्व रिकॉर्ड की खुशी मनाना नहीं है, बल्कि यह भगवद्गीता के अमर ज्ञान के दुनिया भर के दिलों तक पहुँचने का उत्सव है। इसमें शामिल होने वाला हर व्यक्ति एक ऐसे सामूहिक आध्यात्मिक प्रयास का हिस्सा बना, जिसने भूगोल, भाषा और संस्कृति की सीमाओं को पार कर दिया। असली सफलता आंकड़ों में नहीं, बल्कि भगवद्गीता के मूल्यों को जीने और पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी के ‘वेदांत को सभी तक पहुँचाने’ के सपने को आगे बढ़ाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता में है। हम इस उपलब्धि को भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित करते हैं और गुरुदेव की कृपा के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हैं, जो आज भी दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।”

यह उपलब्धि केवल एक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड खिताब से कहीं बढ़कर है। यह दिखाता है कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में भगवद्गीता की सार्वभौमिक (universal) सीख कितनी प्रासंगिक है। इसके साथ ही, यह उपलब्धि चिन्मय मिशन के उस संकल्प को और मज़बूत करती है जिसके तहत वह आधुनिक प्लेटफ़ॉर्म्स के ज़रिए वेदांत के ज्ञान को सभी तक पहुँचा रहा है और सरहदों के पार आध्यात्मिक सीख, सांस्कृतिक जुड़ाव व सामूहिक कल्याण को बढ़ावा दे रहा है।

चिन्मय मिशन अपनी 75 वर्षों की यात्रा का जश्न मना रहा है। ऐसे में यह गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान आध्यात्मिक जागृति, मूल्य-आधारित शिक्षा, संस्कृति के संरक्षण और मानवता की निस्वार्थ सेवा में मिशन के निरंतर योगदान का एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

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