कच्छ के रण में रचा जाएगा इतिहास: भारत में पहली बार 50 टोयोटा हाइलक्स गाड़ियों का विशाल काफिला ‘रोड टू हेवन’ पर भरेगा हुंकार
साहस और पर्यटन के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने के लिए ‘नोमाड हाइलक्स’ और ‘राधे टूरिज्म’ पूरी तरह तैयार हैं। 10 जनवरी को अहमदाबाद के ‘क्लब 07’ से सुबह 6:00 बजे एक भव्य अभियान ‘कच्छ रण उत्सव हाइलक्स एक्सपीडिशन’ का प्रस्थान हुआ। इस भव्य आयोजन के मुख्य सूत्रधार नोमाड हाइलक्स ग्रुप और नारायण गढ़वी (राधे टूरिज्म) हैं, जो पिछले 8 वर्षों से कच्छ के पर्यटन क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। नारायण गढ़वी अब तक 10,000 से अधिक पर्यटकों को कच्छ की सैर करा चुके हैं और बाइकर्स, आर्टिस्ट एवं फोटोग्राफी जैसे विशेष आयोजनों के प्रबंधन में महारत रखते हैं।
इस आयोजन के बारे में उत्साह व्यक्त करते हुए राधे टूरिज्म के संस्थापक नारायण गढ़वी ने बताया कि यह केवल गाड़ियों का काफिला नहीं है, बल्कि कच्छ की अस्मिता और साहस का संगम है। उनका लक्ष्य है कि पूरे भारत से आने वाले हाइलक्स मालिक कच्छ के सफेद रण और ‘रोड टू हेवन’ की अलौकिक सुंदरता को अपनी आंखों से निहारें और गुजरात के पर्यटन का संदेश विश्व भर में फैलाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि सुरक्षा और अनुशासन के साथ रचा जाने वाला यह इतिहास पर्यटन जगत में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब लगभग 50 टोयोटा हाइलक्स गाड़ियां एक साथ 1500 किलोमीटर लंबी साहसिक यात्रा पर निकलेंगी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देशभर के हाइलक्स मालिकों को एक मंच पर लाना और उन्हें कच्छ की अनूठी संस्कृति एवं भौगोलिक विविधता का एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करना है। आयोजकों के अनुसार, यह केवल रिकॉर्ड बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि सही अर्थों में ‘आनंद’ और ‘एडवेंचर’ का अनूठा मिलन है।
यह एक्सपीडिशन विशेष रूप से कच्छ के गौरव माने जाने वाले ‘रोड टू हेवन’, सफेद रण और ‘भुज कैन्यन’ जैसे अद्भुत स्थलों से होकर गुजरेगा। इन विशिष्ट स्थलों के चयन के पीछे का उद्देश्य अखिल भारतीय ट्रैवल कम्युनिटी तक गुजरात के छिपे हुए पर्यटन रत्नों की जानकारी पहुँचाना है। यात्रा के दौरान प्रतिभागी धोलावीरा में आयोजित होने वाले पतंग उत्सव (काइट फेस्टिवल) में भी शामिल होंगे और सफेद रण की रोमांचक सफारी का लुत्फ उठाएंगे, जिससे प्रसिद्ध नारा “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा” सार्थक होगा।
इतने बड़े पैमाने पर आयोजित इस कार्यक्रम में सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरे मार्ग पर 8 मार्शल टीमें और 4 ट्रैफिक मैनेजमेंट टीमें मुस्तैद रहेंगी। किसी भी तकनीकी खराबी से निपटने के लिए 2 बैकअप वाहन और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए एक मेडिकल टीम काफिले के साथ तैनात रहेगी। इसके अलावा, भारत के अंतिम पश्चिमी बिंदु (कोटेश्वर/लखपत) जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की यात्रा पूर्णतः अनुशासित तरीके से संपन्न की जाएगी।
