“प्राइमटाइम टेलीविज़न पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व की ज़िम्मेदारी है” कहते हैं प्रविष्ट मिश्रा, कलर्स के ‘बरेली के बच्चन’ में

“प्राइमटाइम टेलीविज़न पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व की ज़िम्मेदारी है” कहते हैं प्रविष्ट मिश्रा, कलर्स के ‘बरेली के बच्चन’ में

कलर्स का ‘बरेली के बच्चन’ अपने अनोखे किरदारों, ज़बरदस्त कॉमेडी और टीवी पर अब तक देखे गए सबसे अलग परिवार के साथ दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा चुका है। बरेली की चहल‑पहल वाली गलियों में सेट यह शो बच्चन परिवार की कहानी है, जो सालों से बिना किसी महिला के जी रहा है और किसी तरह इनकार, अफरातफरी और ज़िद्दी जुगाड़ के सहारे ज़िंदगी काट रहा है। इस घर के बीचोंबीच है कृष्णा (प्रविष्ट मिश्रा द्वारा निभाया गया), जिसकी उम्मीदें कभी खत्म नहीं होतीं। लेकिन जब संगम (रमनीक कटारिया द्वारा निभाया गया) इस घर में कदम रखती है और उसकी बनाई हुई दुनिया को मानने से इंकार कर देती है, तब शुरू होती है असली कहानी। दो बिल्कुल अलग सोचों का टकराव दर्शकों को हँसी, ड्रामा और दिल छू लेने वाले पलों से भरपूर सफ़र पर ले जाएगा। यह कहानी दर्शकों को बच्चन परिवार की खामियों के बावजूद उनसे जुड़ने पर मजबूर कर देगी। प्रविष्ट मिश्रा बताते हैं कि उन्हें कृष्णा और बच्चन परिवार की दुनिया में क्या खींच लाया।

  1. हमें ‘बरेली के बच्चन’ के बारे में बताइए। इस शो और किरदार को हाँ कहने की वजह क्या रही?
  2. ‘बरेली के बच्चन’ एक दिल छू लेने वाली कहानी है, जिसमें बरेली के एक ऐसे घर को दिखाया गया है जहाँ सिर्फ़ पुरुष रहते हैं और महिला की गैरमौजूदगी ने सबको अपनी जगह पर रोक दिया है। वे लोग जुगाड़, अफरातफरी और इनकार के सहारे जी रहे हैं। इस दुनिया का केंद्र है कृष्णा, जो हमेशा पॉज़िटिव रहने वाले लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। माँ के जाने के बाद घर की रौनक खत्म हो गई थी। कृष्णा उस खालीपन को इनकार और झूठी उम्मीदों से भरता है। वह मानता है कि सब कुछ परफेक्ट है, क्योंकि सच्चाई स्वीकार करना मतलब दर्द का सामना करना। उसकी ज़िद है कि वह इस घर में एक महिला लाएगा और सबको गलत साबित करेगा। वही महिला है संगम, जो उसकी झूठी दुनिया को तुरंत पहचान लेती है और उसे लगातार चुनौती देती है। यही दोनों के बीच असली टकराव और कहानी का मज़ा है। मेरे लिए इस शो को हाँ कहने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि मेरे परिवार में कृष्णा भगवान के प्रति गहरी श्रद्धा है और शो में मेरा नाम भी कृष्णा है। यह मेरे लिए एक संकेत जैसा था कि यह किरदार मेरे लिए ही बना है। इसलिए इस शो को स्वीकार करना मेरे लिए बिल्कुल आसान फैसला था।
  • हमें अपने किरदार के बारे में बताइए और यह आपके पहले निभाए गए रोल्स से कितना अलग है?
  • कृष्णा ऐसा इंसान है जो सचमुच मानता है कि अगर आप समस्याओं पर ध्यान ही न दें तो वे खत्म हो जाती हैं। वह दुनिया को हमेशा गुलाबी चश्मे से देखता है और खुद को व दूसरों को लगातार यह यकीन दिलाता है कि ज़िंदगी परफेक्ट है, चाहे हालात कितने भी बिगड़े हों। उसकी पॉज़िटिविटी नकली या चालाकी नहीं है, बल्कि उसका जीने का तरीका है। वह सचमुच उसी दुनिया पर विश्वास करता है जो उसने अपने लिए बनाई है। फिर उसकी ज़िंदगी में आती है संगम, जो उसकी बनाई हुई दुनिया को मानने से साफ़ इंकार करती है। वह उसे लगातार चुनौती देती है और यही दोनों के बीच मज़ेदार और दिलचस्प टकराव पैदा करता है। कृष्णा मेरे पहले निभाए गए किरदारों से अलग इसलिए है क्योंकि उसकी उम्मीदें दिल के दर्द से पैदा हुई हैं। आमतौर पर पॉज़िटिव किरदार हल्के‑फुल्के या बेफिक्र दिखाए जाते हैं, लेकिन कृष्णा की पॉज़िटिविटी उसका तनाव से निपटने की रणनीति है। बच्चन परिवार की हर शख्सियत माँ के जाने के दुख को अपने‑अपने तरीके से जी रही है, और मेरा किरदार उस दर्द से निपटने के लिए उम्मीद और भ्रम का सहारा लेता है। इस भावनात्मक गहराई को निभाते हुए किरदार की कॉमेडी बनाए रखना मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव रहा।
  • आपने इस किरदार के लिए कैसी तैयारी की?
  • चूँकि मैं इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से हूँ, इसलिए उत्तर प्रदेश की संस्कृति और भाषा से पहले से ही परिचित था। लेकिन बरेली की बोली इलाहाबाद से अलग है। बरेली की अपनी खड़ी बोली है, उसका अलग लहजा और कुछ खास शब्द‑अभिव्यक्तियाँ हैं। इस असलीपन को सही ढंग से पकड़ने के लिए मैंने एक वर्कशॉप अटेंड की, जहाँ हमने बोली, उच्चारण और स्थानीय तौर‑तरीकों पर विस्तार से काम किया। खास ध्यान उन शब्दों और वाक्यों पर दिया गया जो बरेली से जुड़े हुए हैं। साथ ही, उत्तर प्रदेश में पले‑बढ़े होने की वजह से कृष्णा से जुड़ना मेरे लिए सहज था। उसकी गर्मजोशी, परिवार से भावनात्मक जुड़ाव और ज़िंदगी को देखने का नज़रिया मुझे बहुत अपना लगा। प्राइमटाइम टेलीविज़न पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व की बात है।
  • कहानी बरेली में सेट है और आपने वहाँ काफी समय शूटिंग में बिताया है। आपके लिए वह अनुभव कैसा रहा?
  • बरेली में शूटिंग करना सचमुच हम सबके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। इस शहर की गर्मजोशी और ऊर्जा को शब्दों में बयान करना मुश्किल है, जब तक आप खुद उसे महसूस न करें। सबसे ज़्यादा हैरानी इस बात की हुई कि लोगों ने हमें शुरुआत से ही इतना प्यार दिया। प्रमो रिलीज़ होने से पहले ही लोग शूटिंग लोकेशन पर इकट्ठा हो जाते थे, तस्वीरें लेते थे, हमें चीयर करते थे और शो को लेकर उत्साह दिखाते थे। कई बार भीड़ इतनी बड़ी होती थी कि सुरक्षा की ज़रूरत पड़ती थी। यह सब हमारे लिए किसी सपने जैसा था, क्योंकि लोग शो को देखे बिना ही हमें इतना सपोर्ट कर रहे थे। इस तरह का प्रोत्साहन हमें और मेहनत करने की प्रेरणा देता था और हम सबने अपना बेस्ट देने की कोशिश की। इसके अलावा, बरेली में समय बिताने से हमें वहाँ की संस्कृति, भाषा और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को और गहराई से समझने का मौका मिला, जिससे शो में असली रंग आया। कृष्णा के ज़रिए उत्तर प्रदेश की आत्मा और दिल को दर्शाना मेरे लिए सम्मान की बात है।
  • इस शो में अपने सह‑कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
  • यह अनुभव शानदार रहा क्योंकि हर कलाकार अपने किरदार में कुछ अलग लेकर आया है। यशपाल सर का काम देखना ही अपने आप में सीखने जैसा है। किन्शुक, अंश, सचिन और रमनीक ने अपने किरदारों को इतनी ईमानदारी और सच्चाई से निभाया है कि परिवार की केमिस्ट्री बहुत नैचुरल लगती है। कहानी एक असंगठित परिवार के इर्द‑गिर्द घूमती है, इसलिए हमारे बीच आराम और बॉन्डिंग बनाना बहुत ज़रूरी था। सौभाग्य से हम सबने ऑफ‑स्क्रीन भी जल्दी ही दोस्ती कर ली और वही अपनापन ऑन‑स्क्रीन भी दिखता है। सेट पर हँसी‑मज़ाक, इम्प्रोवाइज़ेशन और मज़ेदार पल लगातार चलते रहते हैं, जिससे हर दिन काम करना आसान और मज़ेदार हो जाता है।
  • बच्चन परिवार का कौन‑सा सदस्य आपको लगता है कि दर्शकों से सबसे ज़्यादा जुड़ पाएगा?
  • यही इस शो की खूबसूरती है कि हर दर्शक किसी न किसी बच्चन में खुद को देख पाएगा। बहुत से लोग गंगा से जुड़ेंगे, क्योंकि वह परिवार का बोझ अपने कंधों पर उठाता है। हर घर में कोई न कोई ऐसा होता है जो बिना किसी क्रेडिट लिए ज़िम्मेदारी निभाता है और भावनात्मक सहारा बनता है। कुछ लोग कृष्णा से जुड़ेंगे, जो हमेशा परिवार को साथ रखने की कोशिश करता है, भले ही उसका तरीका यह दिखावा करना हो कि सब कुछ ठीक है। बच्चन परिवार से संबंधित है क्योंकि वे अपूर्ण हैं। वे झगड़ते हैं, गलतियाँ करते हैं, मुश्किल बातों से बचते हैं और कभी‑कभी एक‑दूसरे को परेशान भी करते हैं। लेकिन अंत में एक अनकहा प्यार है जो उन्हें जोड़कर रखता है। मुझे लगता है दर्शक इसे तुरंत पहचान लेंगे क्योंकि यही असली परिवारों की सच्चाई है। कोई भी परफेक्ट नहीं होता, किसी के पास सारे जवाब नहीं होते, लेकिन फिर भी आप हर हाल में एक‑दूसरे के लिए मौजूद रहते हैं।
  • आने वाली कहानी में दर्शक क्या उम्मीद कर सकते हैं?
  • ‘बरेली के बच्चन’ छोटे शहर की अफरातफरी और बड़े दिल वाली भावनाओं का संगम है, जो हर पीढ़ी के चेहरे पर मुस्कान ले आएगा। यह शो हँसी, भावनाओं, पारिवारिक ड्रामा और अप्रत्याशित मोड़ों का बेहद मनोरंजक मिश्रण है। कहानी के केंद्र में है कृष्णा और संगम का रिश्ता। कृष्णा यह साबित करने पर अड़ा है कि उसका परिवार और घर परफेक्ट है, जबकि संगम पहले दिन से ही सच्चाई देख लेती है। इन दोनों दुनियाओं का टकराव कई मज़ेदार पल पैदा करता है, लेकिन साथ ही परिवार के हर सदस्य के लिए भावनात्मक सफ़र भी खोलता है। जैसे‑जैसे कहानी आगे बढ़ेगी, दर्शक जान पाएंगे कि बच्चन परिवार का हर सदस्य ऐसा क्यों है और वे अपने दुख, अकेलेपन, उम्मीदों और आशाओं से कैसे निपटते हैं। यह एक ऐसी कहानी है जो आपको हँसाएगी भी और दिल को छू भी जाएगी।

देखिए ‘बरेली के बच्चन’, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:00 बजे सिर्फ़ कलर्स और जियोहॉटस्टार पर!

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