फिज़िक्सवाला ने पूरे भारत में कक्षा 10 के सीबीएसई छात्रों के लिए मुफ्त डाउट हल करने में मदद और मॉक प्रीबोर्ड्स की घोषणा की
शिक्षा कंपनी फिज़िक्सवाला(पीडब्ल्यू) ने कक्षा 10 के सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में भाग लेने वाले छात्रों की मदद के लिए एक योजना शुरू की है। इसमें देश के सभी छात्र मुफ्त डाउट हल करने में विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं। यह योजना सिर्फ पीडब्ल्यू के छात्रों के लिए नहीं, बल्कि देश के किसी भी कक्षा 10 के छात्र के लिए खुली है। इसका उद्देश्य परीक्षा के समय पढ़ाई का तनाव कम करना है।
पीडब्ल्यू देशभर में विज्ञान और गणित के लिए ऑफ़लाइन प्रीबोर्ड भी करवाएगा ताकि छात्रों की तैयारी मजबूत हो सके। ये परीक्षा पीडब्ल्यू के विध्यापीठ, पाठशाला और ट्यूशन सेंटर्स में होंगी। इससे छात्रों को असल बोर्ड परीक्षा जैसा अनुभव मिलेगा और वे समय सीमा में परीक्षा की तैयारी बेहतर कर सकेंगे।
फिज़िक्सवाला के विध्यापीठ-ऑफलाइन के सीईओ अंकित गुप्ता ने बताया कि, “शिक्षा पर कोई सीमा नहीं होनी चाहिए, खासकर जब छात्र बोर्ड परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण तैयारी कर रहे हों। कई छात्रों को तुरंत अच्छी मदद नहीं मिलती और एक छोटा डाउट भी उन्हें तनाव दे सकता है। इसलिए हमने अपने विध्यापीठ, पाठशाला और ट्यूशन सेंटर्स सभी छात्रों के लिए खोल दिए हैं, चाहे वे फिज़िक्सवाला के छात्र हों या नहीं। हम चाहते हैं कि छात्र खुद को सहारा मिला हुआ, आत्मविश्वासी और पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने के लिए तैयार महसूस करें।”
भारत के सभी छात्र अपने पास के फिज़िक्सवाला विध्यापीठ, पाठशाला या ट्यूशन सेंटर जा सकते हैं और एक “डाउट बस्टर पास” ले सकते हैं, जो बोर्ड परीक्षा तक वैध रहेगा। इस पास के साथ छात्र जो भी उनके डाउट्स हों उनके हल के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। अनुभवी शिक्षक छात्रों के सवालों का जवाब देंगे, मुश्किल टॉपिक समझाएंगे और उत्तर लिखने की रणनीति भी बताएंगे। छात्र भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान सभी विषयों की शंकाओं को हल कर सकते हैं और सीबीएसई कक्षा 10 के लिए रिविजन कार्ड भी प्राप्त कर सकते हैं, जो उनकी तैयारी में मदद करेगा।
छात्र अपने नज़दीकी सेंटर में 1 फरवरी 2026 को होने वाली विज्ञान परीक्षा और 8 फरवरी 2026 को होने वाली गणित परीक्षा के लिए पीडब्ल्यू ऐप के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं।
यह योजना फिज़िक्सवाला के कुल 192 टेक्नोलॉजी वाले विध्यापीठ और पाठशाला सेंटर के जरिए शुरू की जा रही है, जो 30 सितंबर 2025 तक भारत के 132 शहरों में उपलब्ध रहेगी।
