सिनियर सिटिज़न महिला की जमीन पर अतिक्रमण का प्रयास: कैलास सोसाइटी पर गंभीर आरोप

सिनियर सिटिज़न महिला की जमीन पर अतिक्रमण का प्रयास: कैलास सोसाइटी पर गंभीर आरोप

धांगध्रा (सुरेंद्रनगर): धांगध्रा शहर में स्थित अंबिका ऑयल मिल के पास की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। यहां रहने वाली एक वरिष्ठ नागरिक महिला ने आरोप लगाया है कि कैलास सोसाइटी के कुछ सदस्यों ने मिलकर उनकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया है। महिला का कहना है कि सोसाइटी के लोगों ने गलत लोकेशन और जाली दस्तावेजों के आधार पर जमीन का सौदा किया है।

महिला ने बताया कि उन्होंने 19-03-1990 को वैध दस्तावेजों के साथ उक्त जमीन खरीदी थी, और न्यायालय के आदेश से जमीन का कब्जा भी उन्हें सौंपा गया था। इसके बावजूद, वर्तमान में सोसाइटी के कुछ सदस्य और अध्यक्ष मिलकर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जमीन की रजिस्ट्री करते समय संबंधित पक्ष ने प्लान दिखाकर स्पष्ट किया था कि उनकी सीमा कहां तक है। वर्तमान में उनका गोदाम जिस पर टिन की छत है, उसका पानी भी उनके ही खांचे में गिरता है – जिससे उनके हक का प्रमाण मिलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा किया गया है और संभव है कि यह अतिक्रमण सरकारी जमीन पर भी हुआ हो, क्योंकि पहले यहां से जिन मिल तक जाने का रास्ता था।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि सोसाइटी के अध्यक्ष ने वह जमीन, जो उनकी खुद की नहीं थी, किसी और को बेच दी और दस्तावेज में झूठा उल्लेख किया कि वह जमीन सोसाइटी की है – जो कि एक आपराधिक कृत्य है। संबंधित दस्तावेज में भूमि प्लॉट नं. 4621-47 दर्शाया गया है, जबकि सिटी सर्वे रिकॉर्ड में उसे 6185-47 के रूप में दर्ज कराया गया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस कथित भूमि कब्जाधारियों के साथ क्या कार्रवाई करती है।

महिला ने यह भी मांग की कि सोसाइटी के सभी मकान निर्धारित प्लान के अनुसार बने हैं या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही रश्मीबेन ललितभाई द्वारा किए गए बाहरी निर्माण की भी जांच आवश्यक है।

सोसाइटी के दस्तावेजों के अनुसार केवल प्लॉट नं. 4621-47 की ही खरीद दर्शाई गई है, जबकि बाकी जमीन ‘फ्री में’ दी गई बताई गई है – जो जमीन हड़पने की आशंका को जन्म देती है। विशेष बात यह है कि कैलास सोसाइटी का अस्तित्व वर्ष 1982 से दर्शाया गया है, लेकिन वर्ष 2012 तक किसी भी सदस्य के नाम पर जमीन की एंट्री नहीं कराई गई थी। यदि 1982 में जमीन ली गई और 2012 में नाम चढ़ाया गया, तो इस 30 साल की अवधि में टैक्स किसके नाम से भरा गया – यह भी जांच का विषय है।

महिला ने दावा किया कि प्लान पास कराते समय भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के कारण जमीन खरीदने वाले वैध नागरिकों को तनाव झेलना पड़ता है। वरिष्ठ नागरिक महिला ने सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और उचित कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है।

अंत में उन्होंने कहा, “हम महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक हैं। ऐसे असामाजिक तत्व गलत तरीके से दबाव बनाकर जमीन कब्जाने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने धांगध्रा नगरपालिका के मुख्य अधिकारी को शिकायत दर्ज कराई है और साथ ही ‘लैंड ग्रैबिंग’ की विधिवत शिकायत भी दी है।

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